Valmiki Community Bandh In Jalandhar Showed Widespread Effect – Jalandhar Bandh: बाजारों में पसरा सन्नाटा, पुलिस रही सतर्क, वाल्मीकि समुदाय के बंद का दिखा व्यापक असर

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पंजाब के पूर्व महाधिवक्ता (एजी) अनमोल रतन सिद्धू की वाल्मीकि समाज पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद शुक्रवार की जालंधर बंद की कॉल का असर साफ दिखा। बाजारों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा, न दुकानें खुलीं और न खरीददारों की भीड़ नजर आई। डीसीपी सिक्योरिटी एंड ऑपरेशन नरेश कुमार डोगरा, एसीपी नार्थ मोहित कुमार सिंगला सहित अलग-अलग थानों की पुलिस और स्पेशल फोर्स सुबह से बाजारों में जाकर दुकानदारों को दुकानें बंद करने की सलाह देते दिखे थे। 

अधिकारियों ने दुकानदारों को यहां तक कह दिया कि अगर दुकान खोलने से नुकसान होगा तो वह खुद जिम्मेदार होंगे। बंद की कॉल से शहर अलर्ट पर था, क्योंकि जालंधर बंद की कॉल वापस नहीं ली गई थी, जबकि अमृतसर में एक धर्म गुरु ने बंद वापस लेने का गुरुवार देर शाम घोषणा कर दी थी। इस पर रविदास टाइगर फोर्स के प्रधान जस्सी तल्हन, भारतीय वाल्मीकि समाज के राष्ट्रीय प्रधान सुभाष सोंधी और सचिव नरेश लाल, वाल्मीकि शक्ति समाज, नेशनल वाल्मीकि मिशन व अन्य समाज के लोगों ने कहा कि जबतक पूर्व एजी अनमोल रतन सिद्धू पर पर्चा दर्ज नहीं होगा, संघर्ष जारी रहेगा। 

जालंधर में बंद की कॉल के समर्थन करने के लिए नगर निगम की यूनियनें भी उतर आईं और शहर में कूड़े का उठान, सीवरेज की सफाई का काम बंद रखा। वहीं पुलिस और वाल्मीकि समाज के लोगों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी, जब समाज के लोगों ने बाजारों में घुसने की कोशिश की लेकिन अधिकारियों की सूझबूझ से मामले को शांत करवाया।

जस्सी तल्हन ने कहा कि पूर्व एजी सिद्धू ने समाज के बारे में अपशब्द कहे, वहीं कुछ लोग आरक्षण खत्म करने की बयानबाजी कर रहे हैं, ऐसे लोगों पर कार्रवाई तक संघर्ष नहीं रुकेगा। इधर, पुलिस के दोहरे चरित्र से दुकानदार परेशान दिखे, जो घंटों दुकानों के बाहर बैठे रहे कि शायद पुलिस सुरक्षा देगी और वह दुकानें खोल पाएंगे लेकिन पुलिस पल्ला झाड़ती नजर आई। 

अधिकारी चौक-चौराहों पर खड़े जरूर थे। वह बेबस नजर आए, बंद की कॉल के बाद रोष मार्च निकाले गए, जिससे लोग जाम में फंसे लेकिन पुलिस ने न तो ट्रैफिक डायवर्ट का प्लान बनाया और न ही हालात से निपटने के लिए किसी तरह की तैयारी की। 15 अगस्त के लिए शहर अलर्ट पर है। सुरक्षा को लेकर कमिश्नरेट पुलिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


 
19 अगस्त को मिलने का समय देना सिर्फ छलावा है
सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वाल्मीकि समाज के लोगों ने कहा कि 19 अगस्त को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मिलने का समय दिया है जो सिर्फ एक छलावा है, क्योंकि हमने मांगपत्र पहले ही भेज दिया था, अगर न्याय देना होता तो उस पर अमल करते। बंद की कॉल को देखते हुए सिर्फ खानापूर्ति करते हुए मिलने का समय दिया गया, ताकि सरकार चहेतों के बचा सके।

अमृतसर के संत का वाल्मीकि से कोई लेना-देना नहीं था, हमारा बंद सफल रहा
वाल्मीक समुदाय की नेताओं ने कहा कि गुरुवार देर शाम अमृतसर के एक संत ने बंद की कॉल वापस लेने की घोषणा की थी लेकिन उनका समाज से कोई लेना देना नहीं था। हमने बंद की कॉल को सफल बनाने के लिए प्रयास किए और जालंधर पूर्ण तौर पर बंद रहा, जिसके लिए वह दुकानदारों का आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने उनकी समस्याओं को समझा। नेताओं की ओर से दुकानदारों को अंजाम भुगतने की धमकी वाले बयान पर कहा कि हम बाजारों में गए ही नहीं तो धमकी देने का सवाल कहां से आया, लोगों ने हमारा समर्थन किया यही कारण है कि शहर की सड़कें भी सुनसान दिखीं, कोई घरों से नहीं निकला।

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पंजाब के पूर्व महाधिवक्ता (एजी) अनमोल रतन सिद्धू की वाल्मीकि समाज पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद शुक्रवार की जालंधर बंद की कॉल का असर साफ दिखा। बाजारों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा, न दुकानें खुलीं और न खरीददारों की भीड़ नजर आई। डीसीपी सिक्योरिटी एंड ऑपरेशन नरेश कुमार डोगरा, एसीपी नार्थ मोहित कुमार सिंगला सहित अलग-अलग थानों की पुलिस और स्पेशल फोर्स सुबह से बाजारों में जाकर दुकानदारों को दुकानें बंद करने की सलाह देते दिखे थे। 

अधिकारियों ने दुकानदारों को यहां तक कह दिया कि अगर दुकान खोलने से नुकसान होगा तो वह खुद जिम्मेदार होंगे। बंद की कॉल से शहर अलर्ट पर था, क्योंकि जालंधर बंद की कॉल वापस नहीं ली गई थी, जबकि अमृतसर में एक धर्म गुरु ने बंद वापस लेने का गुरुवार देर शाम घोषणा कर दी थी। इस पर रविदास टाइगर फोर्स के प्रधान जस्सी तल्हन, भारतीय वाल्मीकि समाज के राष्ट्रीय प्रधान सुभाष सोंधी और सचिव नरेश लाल, वाल्मीकि शक्ति समाज, नेशनल वाल्मीकि मिशन व अन्य समाज के लोगों ने कहा कि जबतक पूर्व एजी अनमोल रतन सिद्धू पर पर्चा दर्ज नहीं होगा, संघर्ष जारी रहेगा। 

जालंधर में बंद की कॉल के समर्थन करने के लिए नगर निगम की यूनियनें भी उतर आईं और शहर में कूड़े का उठान, सीवरेज की सफाई का काम बंद रखा। वहीं पुलिस और वाल्मीकि समाज के लोगों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी, जब समाज के लोगों ने बाजारों में घुसने की कोशिश की लेकिन अधिकारियों की सूझबूझ से मामले को शांत करवाया।

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