Two Suspected Patients Of Tomato Flu In Himachal’s Solan, Isolated – Tomato Flu: सोलन में निजी स्कूल के दो छात्रों में सामने आए टोमैटो फ्लू जैसे लक्षण, एक सप्ताह तक आइसोलेट

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हिमाचल प्रदेश के सोलन शहर में टोमैटो फ्लू के दो संदिग्ध मरीज सामने आए हैं। ये दोनों एक निजी स्कूल के छात्र बताए जा रहे हैं। संबंधित स्कूल से डॉक्टरों को फोन पर सूचित किया गया था। इसके बाद डॉक्टरों की टीम स्कूल पहुंची। जहां दो बच्चों में टोमैटो फ्लू जैसे लक्षण दिखे।  हालांकि इन बच्चों के शरीर पर जो लाल धब्बे पड़े हैं, वे काफी छोटे हैं। ऐसे में डॉक्टरों का मानना है कि यह हैंड टू माउथ रोग हो सकता है, जो टोमैटो फ्लू जैसा है। फिलहाल दोनों बच्चों को एक सप्ताह के लिए आइसोलेट कर दिया गया है। डॉक्टरों की टीम इन पर नजर बनाए हुए हैं।

हालांकि चिकित्सकों का दावा है कि एक सप्ताह में बच्चे खुद ठीक हो जाएंगे। टोमैटो फ्लू में अभी तक कोई दवा नहीं है। ऐसे में उनके केवल खुद ठीक होने का इंतजार कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इनके सैंपल भी लिए जाएंगे। उधर, टोमैटो फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी है। संबंधित स्कूल प्रबंधक को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित रंजन तलवाड़ ने कहा कि शहर के निजी स्कूल के दो बच्चों में हैंड टू माउथ वायरस के लक्षण मिले हैं। जो टोमैटो फ्लू की तरह लग रहे हैं। डॉक्टर इन दोनों पर निगरानी बनाए हुए हैं।

टोमैटो फ्लू के प्राथमिक लक्षण बच्चों में देखे गए हैं, जोकि वायरल संक्रमणों के समान हैं। इनमें बुखार, चकते पड़ना और जोड़ों में दर्द शामिल है। इस रोग में थकान, मितली, उल्टी, दस्त, बुखार, निर्जलीकरण, जोड़ों की सूजन, शरीर में दर्द और आम इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। बुखार शुरू होने के एक या दो दिनों के बाद छोटे लाल धब्बे दिखाई देते हैं, जो छाले और फिर अल्सर में बदल जाते हैं। शरीर के कई भागों में टमाटर की तरह छाले पड़ जाते हैं।

शिशुओं और छोटे बच्चों को भी नैपिज, अशुद्ध सतहों को छूने और चीजों को सीधे मुंह में डालने से इस संक्रमण का खतरा होता है। यह बीमारी मुख्य रूप से 10 साल से कम उम्र के बच्चों में होती है। यह वयस्कों में भी हो सकती है।बाहरी राज्य से काफी लोगों का आना-जाना रहता है। ऐसे में यह बीमारी उनके साथ आ सकती है। लोगों को स्वयं इसको लेकर जागरूक रहना होगा।  इस रोग से संबंधित अगर किसी को कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।

ऐसे करें रोकथाम
रोकथाम के लिए सबसे अच्छा उपाय उचित स्वच्छता है। आसपास की जरूरी वस्तुओं और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ संक्रमित बच्चे के खिलौने, कपड़े, भोजन और अन्य सामान को गैर-संक्रमित बच्चों से साझा करने से रोकना चाहिए। इसके अलावा बुखार या दाने के लक्षण वाले बच्चों को गले न लगाएं और न ही उन्हें छुएं।

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हिमाचल प्रदेश के सोलन शहर में टोमैटो फ्लू के दो संदिग्ध मरीज सामने आए हैं। ये दोनों एक निजी स्कूल के छात्र बताए जा रहे हैं। संबंधित स्कूल से डॉक्टरों को फोन पर सूचित किया गया था। इसके बाद डॉक्टरों की टीम स्कूल पहुंची। जहां दो बच्चों में टोमैटो फ्लू जैसे लक्षण दिखे।  हालांकि इन बच्चों के शरीर पर जो लाल धब्बे पड़े हैं, वे काफी छोटे हैं। ऐसे में डॉक्टरों का मानना है कि यह हैंड टू माउथ रोग हो सकता है, जो टोमैटो फ्लू जैसा है। फिलहाल दोनों बच्चों को एक सप्ताह के लिए आइसोलेट कर दिया गया है। डॉक्टरों की टीम इन पर नजर बनाए हुए हैं।

हालांकि चिकित्सकों का दावा है कि एक सप्ताह में बच्चे खुद ठीक हो जाएंगे। टोमैटो फ्लू में अभी तक कोई दवा नहीं है। ऐसे में उनके केवल खुद ठीक होने का इंतजार कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर इनके सैंपल भी लिए जाएंगे। उधर, टोमैटो फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है। विभाग ने एडवाइजरी जारी कर दी है। संबंधित स्कूल प्रबंधक को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमित रंजन तलवाड़ ने कहा कि शहर के निजी स्कूल के दो बच्चों में हैंड टू माउथ वायरस के लक्षण मिले हैं। जो टोमैटो फ्लू की तरह लग रहे हैं। डॉक्टर इन दोनों पर निगरानी बनाए हुए हैं।

टोमैटो फ्लू के प्राथमिक लक्षण बच्चों में देखे गए हैं, जोकि वायरल संक्रमणों के समान हैं। इनमें बुखार, चकते पड़ना और जोड़ों में दर्द शामिल है। इस रोग में थकान, मितली, उल्टी, दस्त, बुखार, निर्जलीकरण, जोड़ों की सूजन, शरीर में दर्द और आम इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। बुखार शुरू होने के एक या दो दिनों के बाद छोटे लाल धब्बे दिखाई देते हैं, जो छाले और फिर अल्सर में बदल जाते हैं। शरीर के कई भागों में टमाटर की तरह छाले पड़ जाते हैं।

शिशुओं और छोटे बच्चों को भी नैपिज, अशुद्ध सतहों को छूने और चीजों को सीधे मुंह में डालने से इस संक्रमण का खतरा होता है। यह बीमारी मुख्य रूप से 10 साल से कम उम्र के बच्चों में होती है। यह वयस्कों में भी हो सकती है।बाहरी राज्य से काफी लोगों का आना-जाना रहता है। ऐसे में यह बीमारी उनके साथ आ सकती है। लोगों को स्वयं इसको लेकर जागरूक रहना होगा।  इस रोग से संबंधित अगर किसी को कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।

ऐसे करें रोकथाम

रोकथाम के लिए सबसे अच्छा उपाय उचित स्वच्छता है। आसपास की जरूरी वस्तुओं और पर्यावरण को स्वच्छ रखने के साथ संक्रमित बच्चे के खिलौने, कपड़े, भोजन और अन्य सामान को गैर-संक्रमित बच्चों से साझा करने से रोकना चाहिए। इसके अलावा बुखार या दाने के लक्षण वाले बच्चों को गले न लगाएं और न ही उन्हें छुएं।

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