Sachin Oberoi Goshala For Govansh In Nahan Sirmour Himachal Pradesh – उम्मीद की मशाल: घर, जमीन गिरवी रख बेसहारा गोवंश के लिए बनाई गोशाला

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सड़कों पर दर-दर की ठोकरें खा रहे जिस निराश्रित गोवंश को आश्रय देने का कार्य सरकार और प्रशासन को करना चाहिए था। वह काम एकता कॉलोनी पांवटा के 33 वर्षीय सचिन ओबरॉय कर रहे हैं। सचिन ओबरॉय यूं तो स्कूल के समय से ही गोवंश संरक्षण की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं, लेकिन तीन साल से वह इस लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। गोवंश के संरक्षण के लिए सचिन ने अपना घर और जमीन गिरवी रखकर बहराल में पांच बीघा जमीन पर गोशाला बनाई है।

इसमें अभी 70 निराश्रित गोवंश को आश्रय दिया है। गोवंश को संरक्षण देने के कारण वह 50 लाख के कर्ज में हैं। सचिन के घर में उनके पिता हरभजन, माता मीना, पत्नी शालू और एक कम उम्र का बेटा है। गोशाला निर्माण के लिए जब घर व जमीन गिरवी रखने की बात आई तो उन्होंने भी अपने बेटे का ही साथ दिया। आज सचिन सड़कों पर घूम-घूम कर बीमार गोवंश को इलाज भी दे रहे हैं। खुद ही बीमार पशुओं को इंजेक्शन लगाते हैं। डॉक्टर से सलाह भी लेते हैं। पशु ज्यादा बीमार हो तो गोशाला में ले जाते हैं। 

गोशाला में एक मुस्लिम बशीर खान भी सचिन के साथ गोवंश की सेवा कर रहे हैं। उनको आर्थिक तंगी के चलते छह महीने से तनख्वाह तक नहीं दी गई। वह फिर भी सेवा में जुटे हैं। गोवंश का चारा भी उधारी में ही चल रहा है। लाखों का कर्ज हो चुका है, फिर भी सचिन की गोसेवा जारी है।

सचिन, गोवंश के लिए चल रही लड़ाई को अधूरा नहीं छोड़ना चाहते। वह चाहते हैं सिरमौर की सड़क पर ठोकरें खा रहे हर पशु को संरक्षण मिले। इसके लिए वह इन दिनों पांवटा में धरने पर हैं। इससे प्रशासन व सरकार के हाथ पैर फूले हुए हैं। सचिन का कहना है कि सरकार ने 2019 गो सेवा आयोग बनाया है। इसमें भर्ती कर्मचारियों को भारी-भरकम वेतन दे रही है।

शराब की हर बोतल पर दो रुपये का टैक्स गो सेवा के नाम पर वसूला जा रहा है। सरकारी मंदिरों की कमाई का 15 प्रतिशत पैसा गोसेवा के नाम पर लिया जा रहा है। ऐसे गोवंश सड़कों पर दर-दर की ठोकरें क्यूं खा रहा है। सचिन ओबराय पांवटा में गोवंश संरक्षण को लेकर धरना शुरू कर चुके हैं। उनका कहना है कि जब तक सिरमौर की सड़क पर एक भी गाय रहेगी उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

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सड़कों पर दर-दर की ठोकरें खा रहे जिस निराश्रित गोवंश को आश्रय देने का कार्य सरकार और प्रशासन को करना चाहिए था। वह काम एकता कॉलोनी पांवटा के 33 वर्षीय सचिन ओबरॉय कर रहे हैं। सचिन ओबरॉय यूं तो स्कूल के समय से ही गोवंश संरक्षण की लड़ाई लड़ते आ रहे हैं, लेकिन तीन साल से वह इस लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। गोवंश के संरक्षण के लिए सचिन ने अपना घर और जमीन गिरवी रखकर बहराल में पांच बीघा जमीन पर गोशाला बनाई है।

इसमें अभी 70 निराश्रित गोवंश को आश्रय दिया है। गोवंश को संरक्षण देने के कारण वह 50 लाख के कर्ज में हैं। सचिन के घर में उनके पिता हरभजन, माता मीना, पत्नी शालू और एक कम उम्र का बेटा है। गोशाला निर्माण के लिए जब घर व जमीन गिरवी रखने की बात आई तो उन्होंने भी अपने बेटे का ही साथ दिया। आज सचिन सड़कों पर घूम-घूम कर बीमार गोवंश को इलाज भी दे रहे हैं। खुद ही बीमार पशुओं को इंजेक्शन लगाते हैं। डॉक्टर से सलाह भी लेते हैं। पशु ज्यादा बीमार हो तो गोशाला में ले जाते हैं। 

गोशाला में एक मुस्लिम बशीर खान भी सचिन के साथ गोवंश की सेवा कर रहे हैं। उनको आर्थिक तंगी के चलते छह महीने से तनख्वाह तक नहीं दी गई। वह फिर भी सेवा में जुटे हैं। गोवंश का चारा भी उधारी में ही चल रहा है। लाखों का कर्ज हो चुका है, फिर भी सचिन की गोसेवा जारी है।

सचिन, गोवंश के लिए चल रही लड़ाई को अधूरा नहीं छोड़ना चाहते। वह चाहते हैं सिरमौर की सड़क पर ठोकरें खा रहे हर पशु को संरक्षण मिले। इसके लिए वह इन दिनों पांवटा में धरने पर हैं। इससे प्रशासन व सरकार के हाथ पैर फूले हुए हैं। सचिन का कहना है कि सरकार ने 2019 गो सेवा आयोग बनाया है। इसमें भर्ती कर्मचारियों को भारी-भरकम वेतन दे रही है।

शराब की हर बोतल पर दो रुपये का टैक्स गो सेवा के नाम पर वसूला जा रहा है। सरकारी मंदिरों की कमाई का 15 प्रतिशत पैसा गोसेवा के नाम पर लिया जा रहा है। ऐसे गोवंश सड़कों पर दर-दर की ठोकरें क्यूं खा रहा है। सचिन ओबराय पांवटा में गोवंश संरक्षण को लेकर धरना शुरू कर चुके हैं। उनका कहना है कि जब तक सिरमौर की सड़क पर एक भी गाय रहेगी उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

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