Politics: Meeting Of Anand Sharma And Ghulam Nabi Azad Raised Political Mercury In Himachal – सियासत: आनंद शर्मा और गुलाम नबी आजाद की मुलाकात ने हिमाचल में चढ़ा सियासी पारा

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कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे चुके गुलाम नबी आजाद से शनिवार को हुई वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा की मुलाकात ने हिमाचल में सियासी पारा चढ़ा दिया है। शिमला में पार्टी छोड़ने से इंकार कर दिल्ली पहुंचते ही गुलाम नबी आजाद के घर पहुंचे आनंद ने प्रदेश के कांग्रेस नेताओं की परेशानियां बढ़ा दी हैं। रविवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से पहले हुई इस मुलाकात के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। आनंद शर्मा के भाजपा में जाने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। 24 और 25 अगस्त को शिमला दौरे पर आए आनंद शर्मा ने जी-23 को लेकर खुलकर बातें की थीं।

उन्होंने कहा था कि जी-23 कांग्रेस के दिल में बैठा है। पार्टी की भलाई के लिए जी-23 के नेताओं ने समय-समय पर अपना पक्ष रखा है। गुलाम नबी आजाद जी-23 के प्रमुख नेता रहे हैं। शुक्रवार को गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्या छोड़ी है। शुक्रवार को ही आनंद शर्मा शिमला से दिल्ली लौटे थे। शनिवार को आनंद शर्मा के गुलाम नबी आजाद के घर पहुंचने से कई तरह की सियासी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। शिमला में आनंद शर्मा के समर्थकों ने बताया कि उन्हें विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने का संदेश देकर आनंद लौटे हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए भी आने की बात कही है। समर्थकों के अनुसार आनंद शर्मा पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।

 प्रदेश में चुनाव प्रचार में उतरने से पहले कांग्रेस ने नई दिल्ली में रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। शनिवार को कांग्रेस के संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश, प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने इस बाबत बैठक की। इस दौरान भाजपा के खिलाफ मीडिया में उठाए जाने वाले मुद्दों पर विस्तार से मंथन किया गया।

दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित हुई बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने प्रदेश के मुद्दों से अवगत कराया। पूर्व की कांग्रेस सरकार के समय किए गए कार्यों की जानकारी दी गई। भाजपा के सत्ता में आने के पूर्व सरकार के कार्यों पर लगाई गई ब्रेक के बारे में बताया गया। राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों की भी जानकारी बैठक में दी गई। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने चुनावी मुद्दों को तय करने के लिए संचार विभाग का गठन किया है। 

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कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे चुके गुलाम नबी आजाद से शनिवार को हुई वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा की मुलाकात ने हिमाचल में सियासी पारा चढ़ा दिया है। शिमला में पार्टी छोड़ने से इंकार कर दिल्ली पहुंचते ही गुलाम नबी आजाद के घर पहुंचे आनंद ने प्रदेश के कांग्रेस नेताओं की परेशानियां बढ़ा दी हैं। रविवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक से पहले हुई इस मुलाकात के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। आनंद शर्मा के भाजपा में जाने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। 24 और 25 अगस्त को शिमला दौरे पर आए आनंद शर्मा ने जी-23 को लेकर खुलकर बातें की थीं।

उन्होंने कहा था कि जी-23 कांग्रेस के दिल में बैठा है। पार्टी की भलाई के लिए जी-23 के नेताओं ने समय-समय पर अपना पक्ष रखा है। गुलाम नबी आजाद जी-23 के प्रमुख नेता रहे हैं। शुक्रवार को गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्या छोड़ी है। शुक्रवार को ही आनंद शर्मा शिमला से दिल्ली लौटे थे। शनिवार को आनंद शर्मा के गुलाम नबी आजाद के घर पहुंचने से कई तरह की सियासी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। शिमला में आनंद शर्मा के समर्थकों ने बताया कि उन्हें विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने का संदेश देकर आनंद लौटे हैं। उन्होंने चुनाव प्रचार के लिए भी आने की बात कही है। समर्थकों के अनुसार आनंद शर्मा पार्टी छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे।

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