Pm Modi Security Breach Case Unsolved After Eight Months – Security Breach Case: आठ महीने बीते, तीन जांच कमेटियां बनीं, मगर पीएम सुरक्षा का मामला अनसुलझा

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पंजाब में पांच जनवरी को फिरोजपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक मामले में अभी तक सवाल जस के तस खड़े हैं जबकि आठ महीने पहले हुई इस घटना में तीन जांच एजेंसियां गठित हुईं लेकिन जांच की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। पांच जनवरी को बठिंडा के भिसियाना वायुसेना स्टेशन से फिरोजपुर जा रहा प्रधानमंत्री का काफिला एक बड़ी सुरक्षा चूक में पियारियाना गांव के पास प्रदर्शनकारियों की नाकेबंदी के कारण 15 से 20 मिनट तक फ्लाईओवर पर फंस गया था। 

घटना के बाद, गृह मंत्रालय (एमएचए) एक टीम गठित कर स्थिति का जायजा लेने सात जनवरी को घटनास्थल पर भेजा था और तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय और एडीजीपी नागेश्वर राव समेत कई अधिकारियों को तलब किया। यहां तक कि तीन जिलों के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इन आरोपों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सुरक्षा चूक की जांच करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मेहताब सिंह गिल और प्रमुख सचिव, गृह मामलों और न्याय, अनुराग वर्मा की एक समिति का गठन किया। 

13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति नियुक्त की। शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा गठित जांच समितियों की कार्रवाई पर रोक लगाकर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को राज्य सरकार द्वारा की गई सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। 

न्यायमूर्ति मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति ने भी घटनास्थल का दौरा किया और कई अधिकारियों को समिति के समक्ष पेश होने के लिए दिल्ली बुलाया। इस सबके बाद भी अभी तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

समिति में पंजाब, चंडीगढ़ के अधिकारी
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई जांच समिति में न्यायमूर्ति मल्होत्रा के अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी के महानिरीक्षक, चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और पंजाब पुलिस के अतिरिक्त डीजीपी (सुरक्षा) भी शामिल थे।

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पंजाब में पांच जनवरी को फिरोजपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक मामले में अभी तक सवाल जस के तस खड़े हैं जबकि आठ महीने पहले हुई इस घटना में तीन जांच एजेंसियां गठित हुईं लेकिन जांच की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। पांच जनवरी को बठिंडा के भिसियाना वायुसेना स्टेशन से फिरोजपुर जा रहा प्रधानमंत्री का काफिला एक बड़ी सुरक्षा चूक में पियारियाना गांव के पास प्रदर्शनकारियों की नाकेबंदी के कारण 15 से 20 मिनट तक फ्लाईओवर पर फंस गया था। 

घटना के बाद, गृह मंत्रालय (एमएचए) एक टीम गठित कर स्थिति का जायजा लेने सात जनवरी को घटनास्थल पर भेजा था और तत्कालीन डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय और एडीजीपी नागेश्वर राव समेत कई अधिकारियों को तलब किया। यहां तक कि तीन जिलों के उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इन आरोपों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सुरक्षा चूक की जांच करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति मेहताब सिंह गिल और प्रमुख सचिव, गृह मामलों और न्याय, अनुराग वर्मा की एक समिति का गठन किया। 

13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति नियुक्त की। शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा गठित जांच समितियों की कार्रवाई पर रोक लगाकर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को राज्य सरकार द्वारा की गई सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। 

न्यायमूर्ति मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली समिति ने भी घटनास्थल का दौरा किया और कई अधिकारियों को समिति के समक्ष पेश होने के लिए दिल्ली बुलाया। इस सबके बाद भी अभी तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

समिति में पंजाब, चंडीगढ़ के अधिकारी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई जांच समिति में न्यायमूर्ति मल्होत्रा के अलावा राष्ट्रीय जांच एजेंसी के महानिरीक्षक, चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल और पंजाब पुलिस के अतिरिक्त डीजीपी (सुरक्षा) भी शामिल थे।

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