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Mushroom Mela: Cordycepus Militranus With Medicinal Properties Sold For Rs 1 Lakh Per Kg Attracted Attention – Mushroom Mela: एक लाख रुपये प्रति किलो बिकने वाली औषधीय गुणों से भरपूर मशरूम ने खींचा ध्यान

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 हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के चंबाघाट में खुंब मेले में मशरूम और इससे निर्मित कई खाद्य वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें एक लाख रुपये प्रति किलो बिकने वाली कोर्डिसीपस मीलिट्रेनस(कीड़ा-जड़ी ) आकर्षण का केंद्र रही। यहां पर डीएमआर के विशेषज्ञों से मशरूम की खासियत जानने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही है। कोर्डिसीपस औषधीय मशरूम है। इसे तैयार करने के बाद सुखाकर बेचा जाता है। हालांकि हिमाचल में इसकी बहुत कम मार्केट है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में इसकी काफी मांग रहती है।  प्रदर्शनी में गेनोडोरमा, हीरेशियम, शिटाखे, ऑएस्टर मशरूम सहित इससे तैयार खाद्य वस्तुएं शामिल रहीं।

इसमें आचार, मशरूम केक, मशरूम कैंडी, मशरूम ज्वार बिस्कुट समेत अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद शामिल रहे। इस मौके पर पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, हिमाचल, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, गुजरात, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर के किसानों ने भाग लिया। इस मौके पर मुख्यातिथि पूर्व सांसद प्रो. वीरेंद्र कश्यप ने प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। खुंब निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने उत्पादन कक्षों और एससीएसपी योजना के तहत बने कम लागत मशरूम घर का भ्रमण करवाया गया।

ढिंगरी मशरूम में लग रही मक्खी
टीहरी गढ़वाल उत्तराखंड से आए ग्रोवर दिनेश प्रसाद भट्ट ने बताया कि तीन साल पहले उन्होंने डीएमआर से ढिंगरी मशरूम का प्रशिक्षण लिया है। मशरूम का उत्पादन सही हो रहा है लेकिन इसमें मक्खी लग रही है। इससे फसल खराब हो रही है। उन्होंने डीएमआर के विशेषज्ञ डॉ. अनिल से बात की, जिस पर उन्होंने किसानों की समस्या का समाधान भी किया।

कीड़ा-जड़ी की कैसे करें ब्रिकी
अलीगढ़ से आए लोकेश ने बताया कि उन्होंने कीड़ा जड़ी मशरूम लगाई है लेकिन मशरूम लगाने के बाद अब इसकी मार्केट करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने छोटे स्तर पर यह मशरूम लगाई है। विशेषज्ञों ने बताया कि कीड़ा-जड़ी मशरूम सबसे महंगी मशरूम है। इसका कारोबार बड़े स्तर पर किया जाता है। इस मशरूम को समूह में लगाना चाहिए ताकि कंपनी की मांग पूरी हो सके।

कोविड के बीच ऑनलाइन लिया प्रशिक्षण 
पटना से आई ग्रोवर जनक किशोरी ने बताया कि उन्होंने कोविड के बीच ऑनलाइन मशरूम उगाने का प्रशिक्षण लिया था। डीएमआर के विशेषज्ञों से मशरूम के बारे में ऑनलाइन जानकारी हासिल कर अपना फार्म तैयार किया। अब वह मशरूम की खेती कर रही है। इसके अलावा अन्य महिलाओं को भी इसका प्रशिक्षण दे रही है। 

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 हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के चंबाघाट में खुंब मेले में मशरूम और इससे निर्मित कई खाद्य वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें एक लाख रुपये प्रति किलो बिकने वाली कोर्डिसीपस मीलिट्रेनस(कीड़ा-जड़ी ) आकर्षण का केंद्र रही। यहां पर डीएमआर के विशेषज्ञों से मशरूम की खासियत जानने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही है। कोर्डिसीपस औषधीय मशरूम है। इसे तैयार करने के बाद सुखाकर बेचा जाता है। हालांकि हिमाचल में इसकी बहुत कम मार्केट है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मार्केट में इसकी काफी मांग रहती है।  प्रदर्शनी में गेनोडोरमा, हीरेशियम, शिटाखे, ऑएस्टर मशरूम सहित इससे तैयार खाद्य वस्तुएं शामिल रहीं।

इसमें आचार, मशरूम केक, मशरूम कैंडी, मशरूम ज्वार बिस्कुट समेत अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद शामिल रहे। इस मौके पर पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, हिमाचल, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, गुजरात, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर के किसानों ने भाग लिया। इस मौके पर मुख्यातिथि पूर्व सांसद प्रो. वीरेंद्र कश्यप ने प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। खुंब निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने उत्पादन कक्षों और एससीएसपी योजना के तहत बने कम लागत मशरूम घर का भ्रमण करवाया गया।

ढिंगरी मशरूम में लग रही मक्खी

टीहरी गढ़वाल उत्तराखंड से आए ग्रोवर दिनेश प्रसाद भट्ट ने बताया कि तीन साल पहले उन्होंने डीएमआर से ढिंगरी मशरूम का प्रशिक्षण लिया है। मशरूम का उत्पादन सही हो रहा है लेकिन इसमें मक्खी लग रही है। इससे फसल खराब हो रही है। उन्होंने डीएमआर के विशेषज्ञ डॉ. अनिल से बात की, जिस पर उन्होंने किसानों की समस्या का समाधान भी किया।

कीड़ा-जड़ी की कैसे करें ब्रिकी

अलीगढ़ से आए लोकेश ने बताया कि उन्होंने कीड़ा जड़ी मशरूम लगाई है लेकिन मशरूम लगाने के बाद अब इसकी मार्केट करना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने छोटे स्तर पर यह मशरूम लगाई है। विशेषज्ञों ने बताया कि कीड़ा-जड़ी मशरूम सबसे महंगी मशरूम है। इसका कारोबार बड़े स्तर पर किया जाता है। इस मशरूम को समूह में लगाना चाहिए ताकि कंपनी की मांग पूरी हो सके।

कोविड के बीच ऑनलाइन लिया प्रशिक्षण 

पटना से आई ग्रोवर जनक किशोरी ने बताया कि उन्होंने कोविड के बीच ऑनलाइन मशरूम उगाने का प्रशिक्षण लिया था। डीएमआर के विशेषज्ञों से मशरूम के बारे में ऑनलाइन जानकारी हासिल कर अपना फार्म तैयार किया। अब वह मशरूम की खेती कर रही है। इसके अलावा अन्य महिलाओं को भी इसका प्रशिक्षण दे रही है। 

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