Lumpy Skin Disease Outbreak Increased In Punjab – पंजाब में बढ़ा लंपी का प्रकोप, लुधियाना में 634 पशुओं की मौत, टीकाकरण भी पड़ा धीमा

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पंजाब में लंपी को लेकर हालात दिन ब दिन खराब हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की बैठक के बावजूद किसानों को राहत नहीं मिली है। खन्ना में अचानक बीमारी के चलते 50 पशुओं की मौत से किसानों में भय का माहौल है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने मरने वाले पशुओं को दफनाने की जिम्मेदारी पंचायत को सौंप दी है।

बावजूद इसके मरे हुए पशु उठाए नहीं जा रहे हैं। मरे हुए पशु सड़कों के किनारे फेंके जाने से ग्रामीणों में भी रोष है। लुधियाना में अब तक 634 पशुओं की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों की परेशानी और गांव के हालात को देखते हुए अमृतसर प्रशासन ने लंपी चमड़ी रोग से मरने वाले पशुओं को दफनाने की जिम्मेदारी अब पंचायत विभाग सौंप दी है। 

अमृतसर के डीसी हरप्रीत सिंह सूदन ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी किसान के पशु की मृत्यु लंपी चर्म रोग से होती है तो ऐसे में वह अपनी पंचायत, पंचायत सचिव या बीडीपीओ कार्यालय से संपर्क करें, जो उक्त जानवर को दफनाने की व्यवस्था करेंगे।

खन्ना में 50 के करीब पशुओं की मौत, गांव के लोगो में दहशत
लंपी चमड़ी रोग के कारण खन्ना में 50 के करीब पशुओं की मौत हो गई है। जिसकी वजह से शहर व गांव के लोगों में दहशत का माहौल पैदा हो गया है। लुधियाना पशु विभाग के डिप्टी डायरेक्टर परमवीर वालिया ने बताया कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। घर के पास कोई आवारा पशु इस तरह की बीमारी से ग्रस्त है। जिसे सांस लेने में तकलीफ है, उसके शरीर पर फफोले पड़े हैं तो इस नंबर 9876053611 पर सूचित कर सकते हैं। इसके अलावा फोटो खींच कर व्हाट्सएप भी कर सकते हैं।

पटियाला: अव्यवस्था से लंपी बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा
लंपी से मरने वाले पशुओं को शहर में नगर निगम और गांवों में पंचायतों की ओर से न उठाए जाने के चलते इन्हें सड़कों के किनारे या फिर डंपिग साइटों के नजदीक गिराया जा रहा है। इस कारण लंपी बीमारी फैलने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. गुरचरन सिंह ने माना कि उन्हें पिछले दो-तीन दिनों से लगातार गोशालाओं व गांवों से पशुपालकों के फोन आ रहे हैं। उनकी एक ही शिकायत है कि मरे जानवरों को नहीं उठाया जा रहा है। जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने ब्लाक विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) को आदेश जारी कर मरे पशुओं को तुरंत उठाने व गाइडलाइंस के मुताबिक दफनाने को कहा है।

लुधियाना: 634 पहुंचा पशुओं की मौत आंकड़ा
पिछले 15 दिनों में लुधियाना में लंपी रोग से पीड़ित पशुओं की संख्या नौ हजार पार कर गई है। दो सप्ताह में ये संख्या 9240 हो गई है जबकि 634 पशुओं की मौत हो गई है। लगातार बढ़ रहे मामले को देखते हुए पंजाब सरकार ने गॉट पॉक्स वैक्सीनेशन (टीकाकारण) की मुहिम शुरू की है। मगर ये मुहिम कछुआ चाल से चल रही है।

लिहाजा लंपी रोग से पीड़ित पशुओं में संक्रमण बढ़ने की रफ्तार मंद नहीं हो रही है। पशुओं में फैल रही बीमार से डेयरी संचालक चिंतिंत हैं। वे पशुओं में टीकाकरण की रफ्तार और तेज करने की मांग कर रहे है। बताया जा रहा है कि लुधियाना में तीन से चार दिन तक का टीके का स्टॉक मौजूद हैं। स्टॉक की कमी और टीके जल्द नहीं आने से मुहिम धीमी हो रही है। 

ऐसे में सरकार को टीके की उपलब्धता तेज करानी होगी। पशुपालन विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर रामपाल मित्तल ने बताया कि बीमारी का संक्रमण तेज है। किसान बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं के साथ न रखे। बाड़ों से बाहर न जाने दें। साफ सफाई का ध्यान रखे। किसानों की जागरूकता ही पशुओं को बचा सकती है। इसके अलावा किसान पशुओं को टीका लगवाए। उन्होंने बताया कि टीकाकरण का काम जोरों से चल रहा है। स्थिति नियंत्रण में आ रही है।

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पंजाब में लंपी को लेकर हालात दिन ब दिन खराब हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार की बैठक के बावजूद किसानों को राहत नहीं मिली है। खन्ना में अचानक बीमारी के चलते 50 पशुओं की मौत से किसानों में भय का माहौल है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों ने मरने वाले पशुओं को दफनाने की जिम्मेदारी पंचायत को सौंप दी है।

बावजूद इसके मरे हुए पशु उठाए नहीं जा रहे हैं। मरे हुए पशु सड़कों के किनारे फेंके जाने से ग्रामीणों में भी रोष है। लुधियाना में अब तक 634 पशुओं की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों की परेशानी और गांव के हालात को देखते हुए अमृतसर प्रशासन ने लंपी चमड़ी रोग से मरने वाले पशुओं को दफनाने की जिम्मेदारी अब पंचायत विभाग सौंप दी है। 

अमृतसर के डीसी हरप्रीत सिंह सूदन ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी किसान के पशु की मृत्यु लंपी चर्म रोग से होती है तो ऐसे में वह अपनी पंचायत, पंचायत सचिव या बीडीपीओ कार्यालय से संपर्क करें, जो उक्त जानवर को दफनाने की व्यवस्था करेंगे।

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