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Krishna Janmashtami: Visiting Shri Krishna After Traveling 12 Km From Kinnar Yula – Krishna Janmashtami: किन्नौर के यूला से 12 किलोमीटर की यात्रा कर किए श्रीकृष्ण के दर्शन

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हिमाचल प्रदेश किन्नौर जिले के यूला कंडा में जिला स्तरीय कृष्ण जन्माष्टमी पर्व शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। जन्माष्टमी से एक दिन पूर्व श्रद्धालु यूला कंडा की ओर रवाना हुए। गुरुवार को करीब 10:00 बजे स्थानीय ग्रामीण, बौद्ध लामा और अन्य श्रद्धालुओं ने रीति रिवाजों के साथ यूला कंडा के लिए यात्रा शुरू की और लोकगीतों और बौद्ध मंत्रों के साथ करीब 12 किलोमीटर की यात्रा कर शाम लगभग 6:00 बजे सराय भवन पहुंचे। सारी रात भजन कीतर्न कर शुक्रवार को सुबह करीब 4:00 बजे प्रसाद बनाकर भक्ति गीतों के साथ श्री कृष्ण मंदिर की ओर प्रस्थान किया और मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना करने के बाद पशुओं को नमक खिलाया। इस जिला स्तरीय जमाष्टमी पर्व का शुभारंभ प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने किया। उन्होंने सभी लोगों को इस पर्व की शुभकामनाएं दी। 

 जानकारी के अनुसार जिला किन्नौर के यूला गांव से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी और करीब 12,778 फीट की ऊंचाई पर भगवान नामक स्थान पर यूला कंडा में श्रीकृष्ण का यह मंदिर प्राकृतिक झील के बीचोंबीच बना हुआ है। कंडा में पहुंचने के लिए यूला गांव से पैदल लगभग 7 घंटे का समय लगता है। झील के बीचोंबीच स्थित भगवान श्री कृष्ण का मंदिर क्षेत्रवासियों के लिए धार्मिक आस्था का प्रतीक है और यूला कंडा में कई प्रकार के फूल में जड़ी-बूटियां भी पाई जाती हैं। जन्माष्टमी के दिन लोगों ने 18 प्रकार के फूलों से भगवान श्री कृष्ण की पूजा की । 

क्या है मान्यता
 मान्यता है कि इस पवित्र तालाब में बने हुए मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों की ओर से वनवास एवं अज्ञातवास के दौरान किया था, जिससे गांवों की उत्पत्ति के कुछ वर्ष बाद यहां पर जन्माष्टमी पर्व हर वर्ष बड़ी आस्था और धूमधाम से मनाया जाता है। जन्माष्टमी के दिन यूला कंडा में बनी प्राकृतिक झील के साथ बहती नहरों में लोगों ने टोपी डालकर अपना भविष्य जाना। मान्यता है कि यदि टोपी नहर में बहती हुई दूसरे स्थान पर सकुशल बिना डूबे हुए पहुंच जाए तो भाग्य अच्छा होता है और यदि टोपी नहर में डूब जाए तो अच्छा नहीं माना जाता है। 

विस्तार

हिमाचल प्रदेश किन्नौर जिले के यूला कंडा में जिला स्तरीय कृष्ण जन्माष्टमी पर्व शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। जन्माष्टमी से एक दिन पूर्व श्रद्धालु यूला कंडा की ओर रवाना हुए। गुरुवार को करीब 10:00 बजे स्थानीय ग्रामीण, बौद्ध लामा और अन्य श्रद्धालुओं ने रीति रिवाजों के साथ यूला कंडा के लिए यात्रा शुरू की और लोकगीतों और बौद्ध मंत्रों के साथ करीब 12 किलोमीटर की यात्रा कर शाम लगभग 6:00 बजे सराय भवन पहुंचे। सारी रात भजन कीतर्न कर शुक्रवार को सुबह करीब 4:00 बजे प्रसाद बनाकर भक्ति गीतों के साथ श्री कृष्ण मंदिर की ओर प्रस्थान किया और मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना करने के बाद पशुओं को नमक खिलाया। इस जिला स्तरीय जमाष्टमी पर्व का शुभारंभ प्रदेश वन विकास निगम के उपाध्यक्ष सूरत नेगी ने किया। उन्होंने सभी लोगों को इस पर्व की शुभकामनाएं दी। 

 जानकारी के अनुसार जिला किन्नौर के यूला गांव से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी और करीब 12,778 फीट की ऊंचाई पर भगवान नामक स्थान पर यूला कंडा में श्रीकृष्ण का यह मंदिर प्राकृतिक झील के बीचोंबीच बना हुआ है। कंडा में पहुंचने के लिए यूला गांव से पैदल लगभग 7 घंटे का समय लगता है। झील के बीचोंबीच स्थित भगवान श्री कृष्ण का मंदिर क्षेत्रवासियों के लिए धार्मिक आस्था का प्रतीक है और यूला कंडा में कई प्रकार के फूल में जड़ी-बूटियां भी पाई जाती हैं। जन्माष्टमी के दिन लोगों ने 18 प्रकार के फूलों से भगवान श्री कृष्ण की पूजा की । 

क्या है मान्यता

 मान्यता है कि इस पवित्र तालाब में बने हुए मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों की ओर से वनवास एवं अज्ञातवास के दौरान किया था, जिससे गांवों की उत्पत्ति के कुछ वर्ष बाद यहां पर जन्माष्टमी पर्व हर वर्ष बड़ी आस्था और धूमधाम से मनाया जाता है। जन्माष्टमी के दिन यूला कंडा में बनी प्राकृतिक झील के साथ बहती नहरों में लोगों ने टोपी डालकर अपना भविष्य जाना। मान्यता है कि यदि टोपी नहर में बहती हुई दूसरे स्थान पर सकुशल बिना डूबे हुए पहुंच जाए तो भाग्य अच्छा होता है और यदि टोपी नहर में डूब जाए तो अच्छा नहीं माना जाता है। 

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