Kalka-shimla Railroad Turns 120 Years Old, 117-year-old Steam Engine Landed On The Track, Tourists Gathered – Shimla: 120 साल का हो गया कालका-शिमला रेलमार्ग, ट्रैक पर उतरा 117 साल पुराना स्टीम इंजन, सैलानी उमड़े

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 कालका-शिमला हैरिटेज रेलवे ट्रैक बुधवार को 120 साल का हो गया। इस मौके पर रेलवे का इतिहास कहे जाने वाला 117 साल पुराना स्टीम इंजन फिर ट्रैक पर उतरा। स्टीम इंजन को देखने के लिए रेलवे स्टेशन पर स्थानीय लोगों और सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ी। इस मौके पर रेलवे स्टेशन पर कालका-शिमला रेलवे ट्रैक की फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई। बुधवार सुबह 9:40 बजे अंबाला मंडल के उपनिदेशक आदित्य शर्मा की मौजूदगी में सहारनपुर से आई आठ सदस्यीय टीम ने इंजन का निरीक्षण किया। इस मौके पर स्टेशन अधीक्षक संजय गेरा और पूर्व स्टेशन अधीक्षक प्रिंस सेठी भी मौजूद रहे। 9:55 बजे स्टीम बनाने के लिए कोयला जलाया गया। 

जरूरी तैयारियों के बाद स्टीम इंजन प्लेटफ ार्म नंबर दो की ओर रवाना हुआ। इस दौरान स्टीम इंजन की छुक-छुक और तीखी सीटी से स्टेशन परिसर गूंज उठा। इंजन के फोटो और वीडियो लेने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।  सैलानी स्टीम इंजन के साथ सेल्फी लेते दिखे। वरिष्ठ खंड अभियंता (बायलर) वाईके चौधरी की अगुवाई में दो दिन पहले ही सहारनपुर से विशेषज्ञों की टीम इंजन की ओवरहॉलिंग के लिए शिमला पहुंच गई थी। इससे पहले तीन टन कोयले और 5600 लीटर पानी की मदद से स्टीम तैयार की गई। इस काम में स्टीम इंजन के ड्राइवर और सहयोगी स्टॉफ को करीब चार घंटे का समय लगा।

पिस्टन से निकलती है छुक-छुक की आवाज

रेल का पर्याय मानी जाने वाली छुक-छुक की आवाज सिर्फ  स्टीम इंजन से पैदा होती है। स्टीम इंजन में भाप के पिस्टन में आगे पीछे चलने और बाहर निकलने से छुक-छुक की आवाज पैदा होती है। स्टीम इंजन में बजने वाली सीटी भाप के दबाव से बजती है। डीजल इंजन के मुकाबले स्टीम इंजन की सीटी ज्यादा तीखी और दूर तक सुनाई देने वाली होती है।

विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाली तीसरी रेललाइन

शिमला-कालका रेललाइन विश्व धरोहर का दर्जा पाने वाली तीसरी रेल लाइन है। 10 जुलाई 2008 को यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिया है। दार्जिलिंग रेलवे और नीलगिरि रेलवे को भी विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है।

96 किलोमीटर में 102 सुरंगें और 800 पुल

1903 में बिछाई गई 96 किलोमीटर कालका-शिमला रेल लाइन में 102 सुरंगें, 800 पुल, 919 मोड़ और 18 रेलवे स्टेशन हैं। समुद्रतल से ट्रैक की ऊंचाई 2800 से लेकर 7 हजार फीट है।

स्टीम इंजन का इतिहास आंकड़ों की जुबानी 

117 साल पुराना है केसी-520 स्टीम लोकोमोटिव इंजन

1905 में अंग्रेजों ने शिमला से कैथलीघाट के बीच चलाया

1971 के बाद 30 सालों तक वर्कशॉप में खड़ा रहा

2001 में दोबारा बन कर तैयार हुआ

41 टन है इंजन का वजन

80 टन तक खींचने की क्षमता

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