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Home Tribulation In The Bjp In The Four Vidhan Sabhas Regions Before The Elections – Himachal Bjp: चुनाव से पहले चार विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा में बढ़ा गृह क्लेश

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए चार विधानसभा क्षेत्रों में गृह क्लेश बढ़ गया है। चार सिटिंग विधायकों को अपने पक्ष में झटककर जहां भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक चला है, वहीं भितरघात की आशंका भी बढ़ गई है। भाजपा ने दो-दो निर्दलीय और दो कांग्रेस विधायकों को अपने खेमे में मिलाया है। ऐसा देहरा, जोगिंद्रनगर, कांगड़ा और नालागढ़ में किया है। अब यहां विरोध और खींचतान बढ़ने पर भाजपा डैमेज कंट्रोल की रणनीति बना रही है। प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप खुद देहरा, कांगड़ा और नालागढ़ का दौरा कर भाजपाइयों में तालमेल बनाने का प्रयास कर चुके हैं। आगामी दिनों में भाजपा के चुनाव प्रभारी सौदान सिंह और अन्य बडे़ नेता भी इन हलकों का दौरा करने की तैयारी में हैं। पहले भाजपा ने देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह और जोगिंद्रनगर से प्रकाश राणा को पार्टी में शामिल किया।

दोनों पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी भाजपा नेताओं और दो पूर्व मंत्रियों को हराकर विधायक बने थे। इनके भाजपा में आने से पूर्व मंत्रियों रविंद्र सिंह रवि और गुलाब सिंह का नाराज होना स्वाभाविक था। इससे न केवल पूर्व मंत्री और इनके समर्थक नाखुश हैं, बल्कि भाजपा का धूमल खेमा भी खुद को बैकफुट पर पा रहा है। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खीमी राम के कांग्रेस में जाने के बाद नहले पर दहला फेेंकते हुए भाजपा ने कांग्रेस के दो सिटिंग विधायकों को ही अपने साथ मिला लिया। ये कांगड़ा से पवन काजल और नालागढ़ से लखविंद्र राणा हैं। पवन काजल का कांगड़ा में भाजपा मंडल विरोध कर रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय चौधरी भी उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। नालागढ़ में लखविंद्र राणा का भाजपा के पूर्व विधायक केएल ठाकुर और कुछ अन्य नेता विरोध कर रहे हैं।

भाजपा ने चार सिटिंग विधायकों को अपने पक्ष में खड़ा कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। थोड़ी-बहुत नाराजगी होना स्वाभाविक है। दो-चार दिन में स्थिति ठीक हो जाएगी। सभी नेताओं से संपर्क किया जा रहा है। – सुरेश कश्यप, अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश भाजपा

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हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए चार विधानसभा क्षेत्रों में गृह क्लेश बढ़ गया है। चार सिटिंग विधायकों को अपने पक्ष में झटककर जहां भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक चला है, वहीं भितरघात की आशंका भी बढ़ गई है। भाजपा ने दो-दो निर्दलीय और दो कांग्रेस विधायकों को अपने खेमे में मिलाया है। ऐसा देहरा, जोगिंद्रनगर, कांगड़ा और नालागढ़ में किया है। अब यहां विरोध और खींचतान बढ़ने पर भाजपा डैमेज कंट्रोल की रणनीति बना रही है। प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप खुद देहरा, कांगड़ा और नालागढ़ का दौरा कर भाजपाइयों में तालमेल बनाने का प्रयास कर चुके हैं। आगामी दिनों में भाजपा के चुनाव प्रभारी सौदान सिंह और अन्य बडे़ नेता भी इन हलकों का दौरा करने की तैयारी में हैं। पहले भाजपा ने देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह और जोगिंद्रनगर से प्रकाश राणा को पार्टी में शामिल किया।

दोनों पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के करीबी भाजपा नेताओं और दो पूर्व मंत्रियों को हराकर विधायक बने थे। इनके भाजपा में आने से पूर्व मंत्रियों रविंद्र सिंह रवि और गुलाब सिंह का नाराज होना स्वाभाविक था। इससे न केवल पूर्व मंत्री और इनके समर्थक नाखुश हैं, बल्कि भाजपा का धूमल खेमा भी खुद को बैकफुट पर पा रहा है। पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खीमी राम के कांग्रेस में जाने के बाद नहले पर दहला फेेंकते हुए भाजपा ने कांग्रेस के दो सिटिंग विधायकों को ही अपने साथ मिला लिया। ये कांगड़ा से पवन काजल और नालागढ़ से लखविंद्र राणा हैं। पवन काजल का कांगड़ा में भाजपा मंडल विरोध कर रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी संजय चौधरी भी उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। नालागढ़ में लखविंद्र राणा का भाजपा के पूर्व विधायक केएल ठाकुर और कुछ अन्य नेता विरोध कर रहे हैं।

भाजपा ने चार सिटिंग विधायकों को अपने पक्ष में खड़ा कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। थोड़ी-बहुत नाराजगी होना स्वाभाविक है। दो-चार दिन में स्थिति ठीक हो जाएगी। सभी नेताओं से संपर्क किया जा रहा है। – सुरेश कश्यप, अध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश भाजपा

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