Himachal High Court Judgement On Hpu Employees Secretariat Allowance – हिमाचल हाईकोर्ट: प्रदेश विवि के कर्मचारियों के मूल वेतन में जुड़ेगा सचिवालय भत्ता

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।

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– फोटो : ANI

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हाईकोर्ट ने प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को अब सचिवालय भत्ते का लाभ मिलेगा। अदालत ने इस भत्ते को मूल वेतन में जोड़ते हुए पेंशन के लिए गिने जाने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि लेखा परीक्षा विभाग कार्यकारी परिषद के निर्णय के विरुद्ध फैसला नहीं दे सकता।

जब विश्वविद्यालय ने अपने कर्मचारियों को सचिवालय भत्ता दिए जाने का निर्णय लिया है तो उस स्थिति में इस भत्ते को पेंशन के लिए न गिना जाना न्यायोचित नहीं है। विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अदालत से गुहार लगाई थी कि सचिवालय भत्ते को उनकी सेवा के सभी लाभों के लिए गिना जाए। दलील दी गई थी कि विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने वर्ष 1971 में गैर शिक्षकों को सचिवालय भत्ता दिए जाने का निर्णय लिया था।

बाद में इस भत्ते को वेतन का नाम दिया गया, लेकिन अन्य सेवा लाभ के लिए इसे नहीं गिना जा रहा है। 23 अप्रैल, 2012 को सचिवालय प्रशासन ने अपने कर्मचारियों के लिए इस भत्ते को वेतन के साथ जोड़ने का निर्णय लिया था। सरकार की इस अधिसूचना को विश्वविद्यालय ने अपनाया था। सेवा से जुड़े सभी लाभों के लिए इस भत्ते को गिने जाने की सिफारिश की गई। लेकिन स्थानीय लेखा परीक्षा विभाग ने इसे देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद यह निर्णय सुनाया। 

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हाईकोर्ट ने प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को अब सचिवालय भत्ते का लाभ मिलेगा। अदालत ने इस भत्ते को मूल वेतन में जोड़ते हुए पेंशन के लिए गिने जाने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए यह निर्णय सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि लेखा परीक्षा विभाग कार्यकारी परिषद के निर्णय के विरुद्ध फैसला नहीं दे सकता।

जब विश्वविद्यालय ने अपने कर्मचारियों को सचिवालय भत्ता दिए जाने का निर्णय लिया है तो उस स्थिति में इस भत्ते को पेंशन के लिए न गिना जाना न्यायोचित नहीं है। विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने अदालत से गुहार लगाई थी कि सचिवालय भत्ते को उनकी सेवा के सभी लाभों के लिए गिना जाए। दलील दी गई थी कि विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने वर्ष 1971 में गैर शिक्षकों को सचिवालय भत्ता दिए जाने का निर्णय लिया था।

बाद में इस भत्ते को वेतन का नाम दिया गया, लेकिन अन्य सेवा लाभ के लिए इसे नहीं गिना जा रहा है। 23 अप्रैल, 2012 को सचिवालय प्रशासन ने अपने कर्मचारियों के लिए इस भत्ते को वेतन के साथ जोड़ने का निर्णय लिया था। सरकार की इस अधिसूचना को विश्वविद्यालय ने अपनाया था। सेवा से जुड़े सभी लाभों के लिए इस भत्ते को गिने जाने की सिफारिश की गई। लेकिन स्थानीय लेखा परीक्षा विभाग ने इसे देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद यह निर्णय सुनाया। 

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