Himachal Election 2022, State Governments Failed To Control The Price Of Cement In Himachal – चुनावी मुद्दा: हिमाचल में तीन कारखाने, फिर भी पड़ोसी राज्यों से महंगा मिल रहा सीमेंट

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चुनावी मुद्दा हिमाचल।

चुनावी मुद्दा हिमाचल।
– फोटो : अमर उजाला

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 उत्पादक राज्य होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश में सीमेंट अन्य राज्यों से महंगा है। एसीसी, अल्ट्राटेक और अंबुजा जैसे तीन बड़े उद्योग हर दिन करीब 18,000 मीट्रिक टन सीमेंट का उत्पादन प्रदेश में करते हैं। यहां से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ तक सीमेंट जाता है। खास बात यह है कि इन सभी राज्यों में हिमाचल से कम दाम पर सीमेंट की बिक्री होती है। हिमाचल के बिलासपुर के बरमाणा में एसीसी, सोलन और बिलासपुर की सीमा पर बागा में अल्ट्राटेक और सोलन में अंबुजा के सीमेंट उद्योग स्थापित हैं। हैरानी की बात यह है कि इन तीनों कंपनियों की सीमेंट के दाम हिमाचल में ज्यादा और बाहरी राज्यों में कम हैं। प्रदेश में कई सरकारें आईं और र्गइं, कई प्रतिनिधियों ने चुनावों के समय लोगों से वायदे भी किए लेकिन, दामों पर नियंत्रण को लेकर स्थिति जस की तस है। लगातार बढ़ रही कीमतों की रोकथाम के लिए प्रदेश में सत्ता पर काबिज रहीं सरकारें कोई ठोस नीति तैयार करने में नाकाम ही रहीं हैं।

किस उद्योग में कितना उत्पादन
एसीसी में एक दिन में सात हजार मीट्रिक टन सीमेंट/क्लींकर, अल्ट्राटेक में नौ हजार मीट्रिक टन सीमेंट/क्लींकर और अंबुजा में 12 हजार मीट्रिक टन सीमेंट/क्लींकर का उत्पादन होता है। इन तीनों उद्योगों में अगर सीमेंट उत्पादन की हर दिन की बात की जाए तो यह 18 हजार मीट्रिक टन के करीब है।

पांच साल में 100 रुपये बढ़े दाम
साल 2017 से 2022 तक प्रदेश में एसीसी सीमेंट के दाम में 100 रुपये तक की बढ़ोत्तरी हुई है। अन्य कंपनियों ने भी 60 से 70 रुपये बढ़ाए हैं। वर्तमान में प्रदेश में एसीसी सीमेंट प्रति बैग 465, पंजाब में 360, हरियाणा में 365 और दिल्ली में 375 रुपये हैं। अल्ट्राटेक सीमेंट 53 ग्रेड हिमाचल 465, पंजाब 425, हरियाणा 410, दिल्ली 415 रुपये प्रति बैग दाम हैं। इसके अलावा अंबुजा सीमेंट के दाम हिमाचल में 450, पंजाब में 410, हरियाणा में 375, दिल्ली में 360 रुपये प्रति बैग हैं।

क्या कहते हैं लोग
विकास कुमार, भावेश कुमार, ओम प्रकाश और राजकुमार ने कहा कि चुनावों के समय नेता सीमेंट के दाम कम करने की घोषणा तो करते हैं, लेकिन वो धरातल पर नहीं उतर पाती है। सीमेंट उद्योगों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। प्रदेश में सीमेंट का उत्पादन होता है और यहीं पर सीमेंट के दाम अन्य राज्यों से ज्यादा हैं। जबकि, बाहरी राज्यों के लिए ट्रांसपोटेशन का खर्च भी ज्यादा होता है।

विस्तार

 उत्पादक राज्य होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश में सीमेंट अन्य राज्यों से महंगा है। एसीसी, अल्ट्राटेक और अंबुजा जैसे तीन बड़े उद्योग हर दिन करीब 18,000 मीट्रिक टन सीमेंट का उत्पादन प्रदेश में करते हैं। यहां से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और चंडीगढ़ तक सीमेंट जाता है। खास बात यह है कि इन सभी राज्यों में हिमाचल से कम दाम पर सीमेंट की बिक्री होती है। हिमाचल के बिलासपुर के बरमाणा में एसीसी, सोलन और बिलासपुर की सीमा पर बागा में अल्ट्राटेक और सोलन में अंबुजा के सीमेंट उद्योग स्थापित हैं। हैरानी की बात यह है कि इन तीनों कंपनियों की सीमेंट के दाम हिमाचल में ज्यादा और बाहरी राज्यों में कम हैं। प्रदेश में कई सरकारें आईं और र्गइं, कई प्रतिनिधियों ने चुनावों के समय लोगों से वायदे भी किए लेकिन, दामों पर नियंत्रण को लेकर स्थिति जस की तस है। लगातार बढ़ रही कीमतों की रोकथाम के लिए प्रदेश में सत्ता पर काबिज रहीं सरकारें कोई ठोस नीति तैयार करने में नाकाम ही रहीं हैं।

किस उद्योग में कितना उत्पादन

एसीसी में एक दिन में सात हजार मीट्रिक टन सीमेंट/क्लींकर, अल्ट्राटेक में नौ हजार मीट्रिक टन सीमेंट/क्लींकर और अंबुजा में 12 हजार मीट्रिक टन सीमेंट/क्लींकर का उत्पादन होता है। इन तीनों उद्योगों में अगर सीमेंट उत्पादन की हर दिन की बात की जाए तो यह 18 हजार मीट्रिक टन के करीब है।

पांच साल में 100 रुपये बढ़े दाम

साल 2017 से 2022 तक प्रदेश में एसीसी सीमेंट के दाम में 100 रुपये तक की बढ़ोत्तरी हुई है। अन्य कंपनियों ने भी 60 से 70 रुपये बढ़ाए हैं। वर्तमान में प्रदेश में एसीसी सीमेंट प्रति बैग 465, पंजाब में 360, हरियाणा में 365 और दिल्ली में 375 रुपये हैं। अल्ट्राटेक सीमेंट 53 ग्रेड हिमाचल 465, पंजाब 425, हरियाणा 410, दिल्ली 415 रुपये प्रति बैग दाम हैं। इसके अलावा अंबुजा सीमेंट के दाम हिमाचल में 450, पंजाब में 410, हरियाणा में 375, दिल्ली में 360 रुपये प्रति बैग हैं।

क्या कहते हैं लोग

विकास कुमार, भावेश कुमार, ओम प्रकाश और राजकुमार ने कहा कि चुनावों के समय नेता सीमेंट के दाम कम करने की घोषणा तो करते हैं, लेकिन वो धरातल पर नहीं उतर पाती है। सीमेंट उद्योगों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। प्रदेश में सीमेंट का उत्पादन होता है और यहीं पर सीमेंट के दाम अन्य राज्यों से ज्यादा हैं। जबकि, बाहरी राज्यों के लिए ट्रांसपोटेशन का खर्च भी ज्यादा होता है।

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