Himachal Election 2022, Many Candidates Who Won By Very Low Margin Of Votes In Himachal, Read Interesting Inf – Assembly Election: हिमाचल में गिनती के मतों से जीतते आए कई प्रत्याशी, पढ़ें रोचक जानकारी

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हिमाचल प्रदेश सत्ता संग्राम 2022।

हिमाचल प्रदेश सत्ता संग्राम 2022।
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के कई प्रत्याशी गिनती के वोटों से ही जीत का सेहरा अपने सिर बांध पाए थे। किसी ने महज तीन वोट से तो कोई 16 या 24 मतों से विजयी रहा। प्रदेश के विधानसभा चुनावों में बेहद कम मतों के अंतर से कई विधायक बनते रहे हैं। वर्ष 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में कुटलैहड़ से भाजपा प्रत्याशी रामलाल मलांगड़ को 11,660 मत पड़े, जबकि कांग्रेस के महेंद्र पाल को 11,657 वोट पड़े। यानी मलांगड़ महज तीन वोट से चुनाव जीते थे। इसी वर्ष गंगथ में भाजपा के देसराज कांग्रेस के बोध राज से महज 148 मतों से जीते। इसी वर्ष सुलाह में भाजपा के विपिन सिंह परमार 125 मतों के मार्जिन से जीते थे। कुल्लू में भाजपा के चंद्र सेन ठाकुर कांग्रेस के राजकृष्ण गौड़ से मात्र 38 मतों के मार्जिन से ही विजयी हुए। 

सोलन में विवादों में रहे विस चुनाव में कांग्रेस की कृष्णा मोहिनी को भाजपा के महेंद्र नाथ सोफत से जीत महज 26 वोट से नसीब हुई थी। वर्ष 2003 में ऊना में भाजपा के सतपाल सिंह सत्ती कांग्रेस के वीरेंद्र गौतम से महज 51 मतों के मार्जिन से जीते थे। बल्ह में भाजपा के दामोदर दास कांग्रेस के प्रकाश चौधरी से 188 वोट से जीते। वर्ष 2007 में जसवां परागपुर में कांग्रेस के निखिल राजौर भाजपा के बिक्रम सिंह से 118 मतों से जीते। परागपुर में कांग्रेस के योगराज भाजपा के नवीन धीमान से 342 वोट से विजयी हुए। 

भटियात में कांग्रेस के कुलदीप सिंह पठानिया भाजपा के बीएस चौहान से 325 मतों से जीते। भरमौर में भाजपा के तुलसी राम कांग्रेस के ठाकुर सिंह भरमौरी से 16 मतों से विजयी हुए। बंजार से भाजपा के खीमी राम कांग्रेस के सत्य प्रकाश ठाकुर से 232 वोट से जीते। वर्ष 2012 में भटियात से भाजपा के विक्रम जरयाल 111 मत और कसौली से भाजपा के डा. राजीव सैजल कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी से 24 वोट से विजयी हुए। वर्ष 2017 में कसौली से भाजपा के राजीव सैजल कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी से 442 मतों से जीते। किन्नौर से कांग्रेस के जगत सिंह नेगी भाजपा के तेजवंत सिंह नेगी से 120 वोट से जीते। 

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हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के कई प्रत्याशी गिनती के वोटों से ही जीत का सेहरा अपने सिर बांध पाए थे। किसी ने महज तीन वोट से तो कोई 16 या 24 मतों से विजयी रहा। प्रदेश के विधानसभा चुनावों में बेहद कम मतों के अंतर से कई विधायक बनते रहे हैं। वर्ष 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में कुटलैहड़ से भाजपा प्रत्याशी रामलाल मलांगड़ को 11,660 मत पड़े, जबकि कांग्रेस के महेंद्र पाल को 11,657 वोट पड़े। यानी मलांगड़ महज तीन वोट से चुनाव जीते थे। इसी वर्ष गंगथ में भाजपा के देसराज कांग्रेस के बोध राज से महज 148 मतों से जीते। इसी वर्ष सुलाह में भाजपा के विपिन सिंह परमार 125 मतों के मार्जिन से जीते थे। कुल्लू में भाजपा के चंद्र सेन ठाकुर कांग्रेस के राजकृष्ण गौड़ से मात्र 38 मतों के मार्जिन से ही विजयी हुए। 

सोलन में विवादों में रहे विस चुनाव में कांग्रेस की कृष्णा मोहिनी को भाजपा के महेंद्र नाथ सोफत से जीत महज 26 वोट से नसीब हुई थी। वर्ष 2003 में ऊना में भाजपा के सतपाल सिंह सत्ती कांग्रेस के वीरेंद्र गौतम से महज 51 मतों के मार्जिन से जीते थे। बल्ह में भाजपा के दामोदर दास कांग्रेस के प्रकाश चौधरी से 188 वोट से जीते। वर्ष 2007 में जसवां परागपुर में कांग्रेस के निखिल राजौर भाजपा के बिक्रम सिंह से 118 मतों से जीते। परागपुर में कांग्रेस के योगराज भाजपा के नवीन धीमान से 342 वोट से विजयी हुए। 

भटियात में कांग्रेस के कुलदीप सिंह पठानिया भाजपा के बीएस चौहान से 325 मतों से जीते। भरमौर में भाजपा के तुलसी राम कांग्रेस के ठाकुर सिंह भरमौरी से 16 मतों से विजयी हुए। बंजार से भाजपा के खीमी राम कांग्रेस के सत्य प्रकाश ठाकुर से 232 वोट से जीते। वर्ष 2012 में भटियात से भाजपा के विक्रम जरयाल 111 मत और कसौली से भाजपा के डा. राजीव सैजल कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी से 24 वोट से विजयी हुए। वर्ष 2017 में कसौली से भाजपा के राजीव सैजल कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी से 442 मतों से जीते। किन्नौर से कांग्रेस के जगत सिंह नेगी भाजपा के तेजवंत सिंह नेगी से 120 वोट से जीते। 

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