High Court Put A Stay On The Election Of Himachal Pradesh Bar Council – Hp High Court: हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

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हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने देश राज शर्मा की याचिका पर यह आदेश पारित किए। अदालत ने भारतीय अधिवक्ता परिषद और हिमाचल अधिवक्ता परिषद को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई 26 सितंबर निर्धारित की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल की एक सदस्य के लिए चुनाव प्रक्रिया नियमों के विपरीत है। दलील दी गई कि 9 जुलाई 2018 को हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव हुए थे। इस चुनाव में याचिकाकर्ता को पांच वर्षों के लिए सदस्य के रूप में चुना गया था। 7 अगस्त 2018 को उसे भारतीय अधिवक्ता परिषद के लिए मनोनीत किया गया था।

कोविड काल में  याचिकाकर्ता ने अपने करीबी दोस्त और प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा को खोया था। इस सदमे के कारण याचिकाकर्ता ने भारतीय अधिवक्ता परिषद के मनोनीत सदस्य से इस्तीफा दे दिया था। 17 अप्रैल 2020 को उसका इस्तीफा स्वीकार किया गया। भारतीय अधिवक्ता परिषद के अनुसार याचिकाकर्ता प्रदेश बार काउंसिल में पांच वर्षों तक सदस्य रह सकता था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रदेश बार काउंसिल ने एक पद को भरने के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू की है। याचिकाकर्ता ने सिर्फ भारतीय अधिवक्ता परिषद के मनोनीत सदस्य से इस्तीफा दिया है। वह प्रदेश बार काउंसिल में पांच वर्ष तक सदस्य के तौर पर रह सकता है। अदालत ने प्रदेश बार काउंसिल की ओर से शुरू की गई चुनाव प्रक्रिया पर आश्चर्य जताया है।  

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हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने देश राज शर्मा की याचिका पर यह आदेश पारित किए। अदालत ने भारतीय अधिवक्ता परिषद और हिमाचल अधिवक्ता परिषद को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई 26 सितंबर निर्धारित की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल की एक सदस्य के लिए चुनाव प्रक्रिया नियमों के विपरीत है। दलील दी गई कि 9 जुलाई 2018 को हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव हुए थे। इस चुनाव में याचिकाकर्ता को पांच वर्षों के लिए सदस्य के रूप में चुना गया था। 7 अगस्त 2018 को उसे भारतीय अधिवक्ता परिषद के लिए मनोनीत किया गया था।

कोविड काल में  याचिकाकर्ता ने अपने करीबी दोस्त और प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष रमाकांत शर्मा को खोया था। इस सदमे के कारण याचिकाकर्ता ने भारतीय अधिवक्ता परिषद के मनोनीत सदस्य से इस्तीफा दे दिया था। 17 अप्रैल 2020 को उसका इस्तीफा स्वीकार किया गया। भारतीय अधिवक्ता परिषद के अनुसार याचिकाकर्ता प्रदेश बार काउंसिल में पांच वर्षों तक सदस्य रह सकता था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रदेश बार काउंसिल ने एक पद को भरने के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू की है। याचिकाकर्ता ने सिर्फ भारतीय अधिवक्ता परिषद के मनोनीत सदस्य से इस्तीफा दिया है। वह प्रदेश बार काउंसिल में पांच वर्ष तक सदस्य के तौर पर रह सकता है। अदालत ने प्रदेश बार काउंसिल की ओर से शुरू की गई चुनाव प्रक्रिया पर आश्चर्य जताया है।  

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