Dev Uthani Ekadashi 2022 Today, Manglik Karya Will Start – Himachal: देवउठनी एकादशी आज, शुरू हो सकेंगे ये मांगलिक कार्य

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देवउठनी एकादशी 2022

देवउठनी एकादशी 2022
– फोटो : अमर उजाला

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देवउठनी एकादशी शुक्रवार को है और इसी दिन से मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाएंगे। हालांकि 25 नवंबर तक शुक्र अस्त का प्रभाव भी रहेगा। चुनाव से ठीक पहले मांगलिक कार्य शुरू होने से नेताओं को लोगों के साथ संपर्क का मौका मिल जाएगा। देव उठनी एकादशी के बाद गृह प्रवेश, शादी, सगाई सहित अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। राधा कृष्ण मंदिर गंज बाजार के पुजारी पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार माह के लिए सो जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं।

श्रीहरि विष्णु इसी दिन राजा बलि के राज्य से चातुर्मास का विश्राम पूरा करके बैकुंठ धाम को लौटे थे। इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा आराधना से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन तुलसी-सालिग्राम का विवाह होता है और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। हालांकि 25 नवंबर तक शुक्र अस्त के चलते सूतक प्रभाव रहेगा। 

नेताओं को मिलेगा वोट अपील का मौका
चुनाव से ठीक पहले प्रत्याशी लोगों से संपर्क का मौका तलाश रहे हैं। मंगलकार्य शुरू होने के बाद प्रत्याशियों को इसका मौका मिल जाएगा। नेता कार्यक्रमों में शामिल होकर अपने पक्ष में वोट अपील का मौका नहीं छोड़ेंगे। लंबे समय से मांगलिक कार्य बंद होने के कारण नेताओं को सामूहिक तौर पर लोगों से वोट मांगने का मौका नहीं मिल रहा था। 

विस्तार

देवउठनी एकादशी शुक्रवार को है और इसी दिन से मांगलिक कार्य भी शुरू हो जाएंगे। हालांकि 25 नवंबर तक शुक्र अस्त का प्रभाव भी रहेगा। चुनाव से ठीक पहले मांगलिक कार्य शुरू होने से नेताओं को लोगों के साथ संपर्क का मौका मिल जाएगा। देव उठनी एकादशी के बाद गृह प्रवेश, शादी, सगाई सहित अन्य मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। राधा कृष्ण मंदिर गंज बाजार के पुजारी पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार माह के लिए सो जाते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं।

श्रीहरि विष्णु इसी दिन राजा बलि के राज्य से चातुर्मास का विश्राम पूरा करके बैकुंठ धाम को लौटे थे। इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी, देवउठनी ग्यारस, प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा आराधना से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन तुलसी-सालिग्राम का विवाह होता है और मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है। हालांकि 25 नवंबर तक शुक्र अस्त के चलते सूतक प्रभाव रहेगा। 

नेताओं को मिलेगा वोट अपील का मौका

चुनाव से ठीक पहले प्रत्याशी लोगों से संपर्क का मौका तलाश रहे हैं। मंगलकार्य शुरू होने के बाद प्रत्याशियों को इसका मौका मिल जाएगा। नेता कार्यक्रमों में शामिल होकर अपने पक्ष में वोट अपील का मौका नहीं छोड़ेंगे। लंबे समय से मांगलिक कार्य बंद होने के कारण नेताओं को सामूहिक तौर पर लोगों से वोट मांगने का मौका नहीं मिल रहा था। 

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