Amarinder Singh Also Under Investigation In Agricultural Machinery Purchase Scam – कृषि यंत्र खरीद घोटाला: अमरिंदर सिंह तक पहुंचेगी जांच की आंच, मंत्री बोले- जरूरत पड़ी तो पूछताछ होगी

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पंजाब में कृषि मशीनरी खरीद में 150 करोड़ के घोटाले की जांच की आंच पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह तक पहुंचेगी। इसकी वजह यह है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास ही कृषि महकमा था। कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर पूर्व सीएम से पूछताछ की जाएगी।

पंजाब में 2018-19 से 2021-22 के दौरान किसानों को 90422 मशीनें बांटीं गई थीं। कृषि कार्य वाली इन मशीनों की खरीद के लिए केंद्र से 1178 करोड़ रुपये सब्सिडी भी आई थी। आम आदमी पार्टी के सत्ता में आते ही मशीनों की खरीद में घोटाला उजागर होने लगा। कृषि मंत्री ने जिले के कृषि अफसरों से मशीनों का स्थलीय निरीक्षण कराया। इस दौरान तीन जिलों में मशीनों का रिकॉर्ड ही नहीं मिला। कुछ जिलों में मशीनें किसको दी गईं, इसकी जानकारी भी नहीं मिल पाई है। 13 प्रतिशत मशीनें गायब मिलीं।
 
घोटाले की पुष्टि होते ही कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने जांच विजिलेंस से कराने की सिफारिश की है। अब कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने कहा है कि जिस वक्त यह घोटाला हुआ, कृषि मंत्रालय तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास था। मान सरकार के कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने कहा है कि यह कैप्टन की जिम्मेदारी भी थी कि मशीनें सही ढंग से बांटीं जाएं। इस मामले में कैप्टन भी जांच के दायरे में रहेंगे। जरूरत हुई तो उनसे भी पूछताछ होगी। मंत्री ने कहा कि सरकार 150 करोड़ रुपये रिकवर करेगी और जांच में कसूरवार लोगों पर एक्शन भी होगा।

विजिलेंस जांच की मिली मंजूरी
पंजाब सरकार ने गुरुवार को कहा गया है कि उसने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान किसानों के बीच फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के वितरण में 150 करोड़ रुपये के घोटाले की विजिलेंस जांच की मंजूरी दे दी है। विजिलेंस ने जांच भी शुरू कर दी है। कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने बताया कि इस मामले में किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।

विस्तार

पंजाब में कृषि मशीनरी खरीद में 150 करोड़ के घोटाले की जांच की आंच पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह तक पहुंचेगी। इसकी वजह यह है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास ही कृषि महकमा था। कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर पूर्व सीएम से पूछताछ की जाएगी।

पंजाब में 2018-19 से 2021-22 के दौरान किसानों को 90422 मशीनें बांटीं गई थीं। कृषि कार्य वाली इन मशीनों की खरीद के लिए केंद्र से 1178 करोड़ रुपये सब्सिडी भी आई थी। आम आदमी पार्टी के सत्ता में आते ही मशीनों की खरीद में घोटाला उजागर होने लगा। कृषि मंत्री ने जिले के कृषि अफसरों से मशीनों का स्थलीय निरीक्षण कराया। इस दौरान तीन जिलों में मशीनों का रिकॉर्ड ही नहीं मिला। कुछ जिलों में मशीनें किसको दी गईं, इसकी जानकारी भी नहीं मिल पाई है। 13 प्रतिशत मशीनें गायब मिलीं।

 

घोटाले की पुष्टि होते ही कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने जांच विजिलेंस से कराने की सिफारिश की है। अब कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने कहा है कि जिस वक्त यह घोटाला हुआ, कृषि मंत्रालय तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पास था। मान सरकार के कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने कहा है कि यह कैप्टन की जिम्मेदारी भी थी कि मशीनें सही ढंग से बांटीं जाएं। इस मामले में कैप्टन भी जांच के दायरे में रहेंगे। जरूरत हुई तो उनसे भी पूछताछ होगी। मंत्री ने कहा कि सरकार 150 करोड़ रुपये रिकवर करेगी और जांच में कसूरवार लोगों पर एक्शन भी होगा।

विजिलेंस जांच की मिली मंजूरी

पंजाब सरकार ने गुरुवार को कहा गया है कि उसने कांग्रेस के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान किसानों के बीच फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के वितरण में 150 करोड़ रुपये के घोटाले की विजिलेंस जांच की मंजूरी दे दी है। विजिलेंस ने जांच भी शुरू कर दी है। कृषि मंत्री कुलदीप धालीवाल ने बताया कि इस मामले में किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।

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