सोनिया गांधी अपनी कुर्सी सौंपना चाहती थीं, तीन सलाहकारों ने माफीनामे तक पहुंचाया | Sonia Gandhi wanted to hand over her chair, three advisers reached an apology

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जयपुरएक घंटा पहलेलेखक: बाबूलाल शर्मा

राजस्थान कांग्रेस में 10 दिन से चल रहे पॉलिटिकल ड्रामे के बाद गुरुवार को अशोक गहलोत ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से इनकार कर दिया है। आगे वह राजस्थान CM के पद पर रहेंगे या नहीं, इस बारे में उन्होंने कहा है कि इसका फैसला सोनिया गांधी करेंगी।

बड़ा सवाल है कि सोनिया गांधी जिन्हें अपनी कुर्सी सौंपना चाहती थीं, आखिर ऐसी नौबत क्यों आ गई कि उन गहलोत को माफीनामे तक जाना पड़ा?

पहले यह माना जा रहा था कि गांधी परिवार उनको राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर देखना चाहता है ताकि उनके अनुभव का पार्टी को फायदा मिले और कार्यकर्ताओं में अगले चुनाव से पहले नई जान फूंकी जा सके। लेकिन पिछले दिनों में जयपुर में हुए घटनाक्रम और एक के बाद एक बयान सामने आए, उसके बाद यह माना जा रहा है कि उनके सलाहकारों ने सारा मामला उलटा-पुलटा कर दिया।

20 सितंबर से पहले राजस्थान कांग्रेस में सबकुछ सहज दिख रहा था। लग रहा था कि शायद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केंद्रीय राजनीति में जाएंगे। 20 को गहलोत ने देर रात विधायक दल की बैठक में यह संकेत दे दिए थे कि अगर राहुल गांधी अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने को राजी नहीं होंगे तो वे राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नामांकन कर सकते हैं।

इस बयान के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। 25 सितंबर को दिल्ली से ऑब्जर्वर बनकर जयपुर आए अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे की एंट्री के बाद कांग्रेस की राजनीति में अचानक भूचाल आ गया।

आखिर यह हुआ क्यों? और इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं? पढ़िए- इनसाइड स्टोरी…

ऐसे हुई ड्रामे की शुरुआत
गहलोत समर्थकों ने माकन-खड़गे की उपस्थिति में सीएम हाउस में होने वाली विधायक दल की बैठक का बहिष्कार कर दिया और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के घर जाकर सामूहिक इस्तीफा दे दिया। विरोध का कारण था- कहीं एक लाइन का वो प्रस्ताव पास नहीं हो जाए जिसके तहत सारे फैसलों का अधिकार हाईकमान को हो।

गहलोत खेमे के विधायकों का विरोध इसलिए भी था कि अगर ऐसा प्रस्ताव पारित हो गया तो गहलोत को सीएम पद छोड़कर राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना पड़ेगा। इस्तीफा पॉलिटिक्स के पीछे सिर्फ एक ही मकसद था कि गहलोत अगर अध्यक्ष बनें तो हाईकमान कहीं सचिन पायलट को मुख्यमंत्री न बना दें।

इस घटनाक्रम का नतीजा यह हुआ कि गांधी परिवार के विश्वस्त माने जाने वाले गहलोत की राजनीतिक छवि को नुकसान हुआ और यह माना जाने लगा कि वे राजस्थान के सीएम की कुर्सी को छोड़ने के लिए कतई तैयार नहीं है। इस बीच पांच दिन तक खेमेबाजी में बंटी कांग्रेस के नेताओं की तरफ से लगातार बयानों की बौछारों के बीच गुरुवार को दिल्ली में सोनिया गांधी के साथ मुलाकात में गहलोत को राजस्थान में पार्टी की हुई किरकिरी से आहत होकर माफी मांगनी पड़ी।

सियासी ड्रामे के 3 किरदार
शांति धारीवाल

संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल के घर विधायकों की पैरलल मीटिंग से मामला ज्यादा भड़का। धारीवाल ने विधायकों के सामने माकन पर षड्यंत्र करके पायलट को सीएम बनाने के आरोप लगाए। इस बैठक का वीडियो भी वायरल हो गया। दूसरे दिन धारीवाल ने प्रेस काॅन्फ्रेंस करके अपने आरोपों को न सिर्फ दोहराया बल्कि अजय माकन के खिलाफ सबूत होने का भी दावा किया। कांग्रेस हाईकमान ने इस बात पर आपत्ति जताई कि संसदीय कार्यमंत्री होने के बावजूद धारीवाल के घर पर विधायकों की पैरेलल मीटिंग की गई।

महेश जोशी
धारीवाल के घर विधायकों की बैठक से पहले ही महेश जोशी मौजूद थे। यहां से विधायकों को फोन करके बुलाया गया। विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री निवास जाने के बजाय धारीवाल के घर आने के लिए कहा गया। धारीवाल के घर से विधायक जब सीपी जोशी के घर पहुंचे तो महेश जोशी भी वहां मौजूद रहे। धारीवाल और महेश जोशी ने ही विधायकों के इस्तीफे सीपी जोशी को सौंपे। हाईकमान ने इस बात को गंभीर माना कि जो नेता विधानसभा में कांग्रेस दल का मुख्य सचेतक है, वो कैसे विधायक दल की मीटिंग का बहिष्कार करके हाईकमान के निर्देशों का उल्लंघन कर सकता है।

धर्मेंद्र राठौड़
आरटीडीसी के चयरमैन होने के बावजूद विधायकों की धारीवाल के घर मीटिंग कराने के पीछे पूरी योजना बनाई और धारीवाल से घर से सीपी जोशी के घर तक विधायकों को पहुंचाने के लिए बस सहित सारे लॉजिस्टिक इंतजाम धर्मेंद्र राठौड़ ने किए। पार्टी ने धर्मेंद्र राठौड़ को इसके लिए अनुशासनहीनता का दोषी करार देते हुए नोटिस देकर जवाब मांगा।

सोनिया के भेजे ऑब्जर्वर अजय माकन पर लगातार साधते रहे निशाना

पूरे मामले में गहलोत गुट ने प्रभारी अजय माकन पर कई आरोप लगाए। शांति धारीवाल ने कहा था कि अजय माकन षड्यंत्र पूर्वक सचिन पायलट के नाम का प्रस्ताव पास कराना चाहते थे।

पूरे मामले में गहलोत गुट ने प्रभारी अजय माकन पर कई आरोप लगाए। शांति धारीवाल ने कहा था कि अजय माकन षड्यंत्र पूर्वक सचिन पायलट के नाम का प्रस्ताव पास कराना चाहते थे।

शांति धारीवाल ने नोटिस मिलने से पहले प्रेस वार्ता कर प्रभारी अजय माकन पर सीधे आरोप लगाए थे। धारीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि अजय माकन षड्यंत्र पूर्वक सचिन पायलट के नाम का प्रस्ताव पास कराना चाहते थे। उनसे जब पूछा गया तो उन्होंने यह कहा कि हां मैं सीधे तौर पर इस मामले में अजय माकन पर आरोप लगा रहा हूं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद महेश जोशी के भी कई बयान सामने आए। इनमें महेश जोशी ने पायलट गुट पर लगातार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विधायक दल की बैठक पहले भी होती रही है। विधायक दल की बैठक में व्यक्तिगत रायशुमारी का एजेंडा अलग से होता है। सीएम का चयन हो या विधायक दल का नेता बदलना है तो उसके लिए रायशुमारी होती है। लेकिन जिस बैठक में कोई एजेंडा ही नहीं हो तो अलग से रायशुमारी करने की बात कैसे सोच सकते हैं।

धर्मेंद्र राठौड़ भी इस पूरे मामले में आक्रामक नजर आए। राठौड़ ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए प्रभारी अजय माकन पर निशाना साधा। राठौड़ ने माकन को गद्दार बताया। राठौड़ ने कहा कि माकन ने हाईकमान को गुमराह किया और वे षड़यंत्र रच रहे थे। इसके अलावा पायलट गुट के विधायक वेद प्रकाश सोलंकी को भी गद्दार बताया।

यूं चला घटनाक्रम

24 सितम्बर : इसी दिन यह तय हुआ था कि राजस्थान को लेकर 25 सितम्बर को विधायक दल की बैठक होगी। इसके लिए पर्यवेक्षक अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को नियुक्त किया गया। दोनों 25 को हाईकमान का प्रस्ताव पारित कराएंगे।

25 सितम्बर : विधायक दल की बैठक से तीन घंटे पहले से ही यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के घर विधायक इकठ्‌ठा होना शुरू हुए। शांति धारीवाल के घर पर विधायकों की एक पैरेलल मीटिंग हुई। बैठक में निर्णय हुआ कि विधायक विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी को इस्तीफा सौंपेंगे। इस दौरान कई विधायक सीएम हाउस में भी एकत्रित हुए। मगर विधायक दल की बैठक नहीं हो पाई। इसके बाद कई विधायक विधानसभा अध्यक्ष के घर पहुंचे और अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे में ऐसा कुछ नहीं लिखा था कि जिसको पढ़कर स्पष्ट हो कि आखिर वे इस्तीफा क्यों दे रहे हैं।

26 सितम्बर : दोनों पर्यवेक्षक अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे दिल्ली रवाना हो गए। दोनों पर्यवेक्षकों ने इस घटना को अनुशासनहीनता करार दिया। दिल्ली जाकर दोनों ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया। सोनिया से मिलने के बाद अजय माकन ने राजस्थान में हुए घटनाक्रम को लेकर तीखी आलोचना की।

27 सितम्बर : पर्यवेक्षकों ने राजस्थान घटनाक्रम पर लिखित रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौंपी। इस दौरान सचिन पायलट दिल्ली चले गए। घटनाक्रम को लेकर कई विधायकों के अलाकमान के समर्थन में बयान आते रहे। वहीं रात को पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल, चीफ व्हिप महेश जोशी और आरटीडीसी चैयरमेन धर्मेंद्र राठौड़ को नोटिस जारी किया गया। नोटिस में तीनों को घोर अनुशासनहीन बताया और 10 दिन में जवाब मांगा गया।

28 सितम्बर : कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर नए सिरे से चर्चाएं और बैठकों का दौर शुरू हुआ। दिनभर अशोक गहलोत के दिल्ली जाने की चर्चाएं चली। दोपहर में लगभग 20 विधायक-मंत्री गहलोत से मिले। इसके बाद देर रात गहलोत दिल्ली पहुंचे। वहां मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी में इंटरनली ऐसी छोटी-मोटी घटनाएं होती रहती हैं। हम सब सुलझा लेंगे।

29 सितम्बर : दिग्विजय सिंह ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरने की घोषणा की। इधर अशोक गहलोत की सोनिया गांधी से मुलाकात हुई। मुलाकात में गहलोत माफीनामा लेकर गए। सोनिया गांधी काे कहा कि जो घटना हुई वह दुखद है और उससे आहत हूं। मीडिया से बातचीत में गहलोत ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। वहीं सीएम की बात पर उन्होंने कहा कि सीएम का निर्णय सोनिया गांधी करेंगी।

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CM का फैसला सोनिया गांधी करेंगी…

यानी पॉलिटिकल ड्रामा अभी बाकी है। ये भी रहस्य, रोमांच और एंटरटेनमेंट से भरपूर होगा। रोमांचक इसलिए क्योंकि गहलोत की प्रेस ब्रीफिंग के साथ ही पॉलिटिकल पंडितों ने अटकलें लगानी शुरू कर दी हैं।(यहां पढ़ें पूरी खबर)

2. आखिर कैसे लीक हो गया गहलोत का माफीनामा?:इमोशनल कार्ड खेला, सीएम की कुर्सी बचाने की रणनीति, पायलट कैंप वेट एंड वॉच पर

राजस्थान में चल रहे सियासी बवाल के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी से मिलकर माफी मांगी है। गहलोत ने इमोशनल कार्ड खेलते हुए गांधी परिवार और कांग्रेस के प्रति निष्ठा जताई है। इस बवाल की जिम्मेदारी लेते हुए गहलोत ने इसके बाद बने माहौल में अध्यक्ष का चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। (पढ़ें पूरी खबर)

3.पायलट बोले- मैंने अपनी भावनाओं से अवगत कराया: सोनिया से मिलने के बाद कहा- राजस्थान के मामले में निर्णय पार्टी लेगी

राजस्थान में मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका फैसला एक-दो दिन में हो जाएगा। दिल्ली में सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद गुरुवार शाम कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मीडिया से कहा- एक बार फिर ऑब्जर्वर जयपुर जाएंगे। विधायक दल की बैठक बुलाई जाएगी। इसके बाद निर्णय लिया जाएगा कि गहलोत CM होंगे या नहीं।

इधर, गुरुवार रात करीब 8 बजे सचिन पायलट सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे। वेणुगोपाल भी वहां मौजूद रहे। करीब एक घंटे चली बैठक के बाद सचिन पायलट ने मीडिया से बात की। उन्होंने कहा- राजस्थान को लेकर आलाकमान से विस्तार से चर्चा हुई। हमारा मकसद है कि हम अगली बार भी राजस्थान में सरकार बनाएं। सब कुछ ठीक कर लिया जाएगा। (यहां पढ़ें पूरी खबर)

4.सतीश पूनिया से मिले पायलट गुट के विधायक, VIDEO:मंत्री मेघवाल और RTDC चेयरमैन बोले- MLA सोलंकी और माकन ने की गद्दारी

गहलोत सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री गोविंदराम मेघवाल और RTDC चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ ने पायलट गुट की BJP से सांठ-गांठ का CCTV वीडियो जारी किया है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अजय माकन की भी VIDEO जारी कर पायलट गुट की मानेसर कैंप के वक्त बगावत और विधायक वेदप्रकाश सोलंकी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करने पर कहा- सोलंकी और माकन ने गद्दारी की है।
मेघवाल और राठौड़ ने कांग्रेस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी और BJP प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया की एक होटल में आधी रात 12 बजे मुलाकात का CCTV फुटेज जारी किया है। यह CCTV वीडियो जयपुर जिला प्रमुख के चुनाव से ठीक पहले आधी रात का है। (यहां पढ़ें पूरी खबर)

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