बच्चा पैदा करने के लिए रेपिस्ट को दी 15 दिन की पैरोल पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे | Supreme Court stays parole for 15 days to rapist for having a child

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जयपुर3 घंटे पहले

फाइल फोटो।

राजस्थान हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक दिया है, जो पिछले कुछ समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। हाईकोर्ट ने अक्टूबर में एक फैसला दिया था, जिसमें बच्चा पैदा करने के लिए गैंगरेप के दोषी को 15 दिन पत्नी के साथ रहने की इजाजत देते हुए पैरोल दी थी, लेकिन सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती थी।

सुप्रीम में जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बैंच ने ये स्टे ऑर्डर दिया। सरकार की तरफ से सीनियर एडवोकेट मनीष सिंघवी ने पैरवी की। एडवोकेट सिंघवी ने बताया कि सरकार की तरफ से कोर्ट में याचिका डालने के बाद आज इस पर सुनवाई हुई, जिसमें हमारी तरफ से दलील दी गई कि राइट टू पौरोल कोई मौलिक अधिकार नहीं है। राजस्थान में यह पहला फैसला है, जिसमें रेप के किसी दोषी को पैरोल मिली है। राजस्थान के पैरोल रूल्स में रेप या गैंगरेप के मामलों में पैरोल नहीं मिल सकता और न ही ऐसे दोषियों को ओपन जेल में भेजा जा सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट की खण्डपीठ ने पैरोल पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर स्थगन लगा दिया।

आपको बता दें कि अलवर के हनीपुर के रहने वाले राहुल के खिलाफ साल 2019 में 16 वर्ष की नाबालिक के साथ गैंगरेप की एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद स्पेशल पॉस्को कोर्ट अलवर ने सुनवाई के बाद राहुल को दोषी मानते हुए 13 जून 2022 को 20 साल के कारावास की सजा सुनवाई थी। राहुल 30 अक्टूबर 2020 से जेल में बंद है, जबकि उसकी शादी साल 2018 में बृजेश देवी से हुई थी।

अक्टूबर में सुनाया था फैसला
राहुल की पत्नी बृजेश देवी ने बच्चा पैदा करने के अपने मौलिक एवं संवैधानिक अधिकार का हवाला देते हुए अलवर के DJ कोर्ट में 13 जुलाई 2022 को इमरजेंट पैरोल (आपात पैरोल) याचिका लगाई। फिर, कुछ दिन के इंतजार के बाद 20 जुलाई, 2022 को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट में लगाई याचिका में 30 दिन की पैरोल देने की मांग की गई, लेकिन हाईकोर्ट ने राहुल को 15 दिन के पैरोल पर छोड़ने का आदेश सुनाया।

ये याचिका राहुल की सजा के ठीक एक महीने बाद लगाई गई। याचिका में कहा गया कि पत्नी को प्रेग्नेंसी या दंपती को वंश बढ़ाने के लिए रोकना संविधान के आर्टिकल 14 और 21 की भावना के खिलाफ होगा। अलवर के DJ कोर्ट में याचिका लगाने के बाद 7 दिन तक सुनवाई का इंतजार किया, फिर इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

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