पीपीपी मॉडल पर बीके अस्पताल में आईसीयू वार्ड बनाने की योजना, प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजने की तैयारी | Planning to build ICU ward in BK Hospital on PPP model, preparing to make proposal and send it to the government

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भोला पांडेय/फरीदाबाद2 घंटे पहले

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आम आदमी को मिलेगी बड़ी राहत, सरकारी शुल्क पर मरीजाें काे किया जाएगा भर्ती। - Dainik Bhaskar

आम आदमी को मिलेगी बड़ी राहत, सरकारी शुल्क पर मरीजाें काे किया जाएगा भर्ती।

शहरवासियों के लिए अच्छी खबर है। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो बीके अस्पताल में आने वाले समय में गंभीर मरीजाें को आईसीयू वार्ड की भी सुविधा मिलेगी। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग तैयारियां शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि विभाग इस सुविधा को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर शुरू करने की योजना बनाई है। इस सुविधा के शुरू होने से आम आदमी को बहुत फायदा हाेगा। कम पैसों में उनका इलाज संभव हो सकेगा। इसे लेकर सीएमओ डॉ. विनय गुप्ता ने डीसी विक्रम सिंह के सामने प्रस्ताव रखा है। इस पर डीसी ने प्रपोजल बनाकर भेजने को कहा है ताकि इस विषय पर काम किया जा सके।

हर दिन 15 से 20 रेफर हाेते हैं दिल्ली

बता दें कि जिले का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल बीके में आईसीयू वार्ड की सुविधा अभी तक नहीं है। ऐसे में अस्पताल से हर दिन 15 से 20 गंभीर मरीजों को दिल्ली के अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है। क्योंकि आम जन के पास प्राइवेट अस्पताल का बिल अदा करने की क्षमता नहीं होती।

प्राइवेट में एक दिन का खर्च 2500 से तीन हजार तक

मेडिकल सूत्रों की मानें तो प्राइवेट अस्पतालों में आईसीयू वार्ड का एक दिन का खर्च करीब 2500 से 3000 रूपए तक आता है। कई बार मरीजों को एक सप्ताह से 15 दिन तक रखना पड़ता है। ऐसे में आम आदमी के लिए इतनी मोटी रकम खर्च करना आसान नहीं होता। ऐसे लोगों को राहत देने के लिए ही सीएमओ ने आईसीयू वार्ड बनाने की कवायद शुरू की है। ताकि सस्ती दरों पर आपात परिस्थितियों में आने वाले मरीजों को आईसीयू की सुविधा मिल सकें।

इसे कहते हैं आईसीयू यूनिट

आईसीयू यानी (इंटेंसिव केयर यूनिट) किसी भी अस्पताल की एक ऐसी इकाई है, जहां गंभीर रोगों से ग्रसित, ऑपरेशन व ट्रॉमा के मरीजों का इलाज किया जाता है। इस वार्ड में बीमारी के हिसाब से न्यूरो, सर्जिकल व मेडिकल आईसीयू अलग-अलग होते हैं। ऐसे में इनकी मशीनें और डॉक्टर भी भिन्न-भिन्न होते हैं। सीएमओ डॉ. गुप्ता ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को पीपीपी मॉडल पर शुरू करने की योजना है। सरकार द्वारा निर्धारित रेट पर मरीजों को इसकी सुविधा मिलेगी। इस पैसे का प्रयोग डॉक्टरों के वेतन और मेंटिनेंस पर खर्च किया जाएगा।

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